बहुजन समाज को सता की प्राप्ति के लिये मज़बूत समाजिक संगठन बनाकर दृढ़ता के साथ समाजिक संघर्ष करना ज़रूरी होगाः डॉ.टी.एल.सागर

’बहुजन समाज को सता की प्राप्ति के लिये मज़बूत समाजिक संगठन बनाकर दृढ़ता के साथ समाजिक संघर्ष करना ज़रूरी होगाः डॉ.टी.एल.सागर
होशियारपुर- डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर जी के मिशन को समर्पित तथा समाज चिन्तक सर्वश्री मास्टर महिनदर सिंह हीर, मास्टर ज्ञान चंद नईयर तथा प्रेम कुमार डुमेली (प्रधान तालमेल कमेटी कार्पोरेशन) ने बहुत ही सीनियर मिशन को समर्पित तथा समाज चिन्तक डॉक्टर टी.एल.सागर जी के साथ उनके गांव लांबड़ा (जालंधर) में गृह में मिलकर मुलाकात की तथा उनकी सेहत का हालचाल पूछा। इस समय साथियों ने एक नीले रंग का सिरोपा देकर डॉक्टर साहिब को सम्मानित किया। सागर साहिब की ओर से 85 वर्ष की आयु तक भी लगातार मिशनरी सरगर्मियों सम्बन्धी विस्तार के साथ जानकारी प्राप्त की। याद रहे सागर साहिब अम्बेडकर मिशन को प्रणाये, लेखक, विद्वान, विवेक बुद्धि वाले संघर्षों में विश्वास रखने वाले माननीय श्री लाहौरी राम बाली जी के बहुत ही नज़दीकी साथी थे। सागर साहिब डॉ. अम्बेडकर मिशन सोसायटी पंजाब के प्रधान भी लम्बे समय तक रहे तथा अन्य भी समाजिक संगठनों में उनका प्रथम रोल रहा। उपरोक्त तीनों ही समाज सेवी साथियों का समाजिक संघर्षों में सागर साहिब के साथ मेल मिलाप रहा है।
श्री हीर की ओर से उनकी 85 साल की उम्र तक की गई गतीविधियों बारे में विस्तार के साथ जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि बाबा साहिब के नाम सम्बन्धी 1962 के नज़दीक जानकारी रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया (आर.पी.आई.) के नेताओं से प्राप्त की। इसके बाद उनके परिवार का मेल-मिलाप मिशनरी साथियों के साथ हो गया तथा आर.पी.आई. की ओर से दलितों के अधिकारों की प्राप्ति के लिए देश स्तर पर 1964 में जो समाजिक संघर्ष हुआ उसमें उनके परिवार का सरगरम रोल रहा तथा उनका छोटा भाई ’जेल भरो’ आन्दोलन में जेल काटकर भी आया था। इन आन्दोलनों के बाद आर.पी.आई. के पंजाब में 8 एम.एल.ए. बने थे पर समाजिक संगठन न होने के कारण यह सता उनके पास बहुत लम्बे समय तक टिक न सकी। उसके बाद फिर 1981 में देश स्तर पर श्री काशी राम जी की अध्यक्षता में बामसेफ, डी.एस. ने जन्म लिया जिसने फिर अम्बेडकर मिशन की पतन की तरफ गई लहर को पूरे देश में ज़ोर-शोर के साथ फैला दिया पर इनकी मज़बूती किये बिना राजनीतिक पार्टी बहुजन समाज पार्टी का जन्म हुआ जिसने पंजाब में 1992 में 9 एम.एल.ए. बनाये तथा अन्य स्थानों पर यू.पी. में भी चार बार सता हासिल की। अन्य स्थानों पर भी बहुत सारे एम.एल.ए./एम.पी. बने पर समाजिक संगठनों की मज़बूती न होने के कारण वो भी सता गंवा बैठे। श्री हीर के बार-बार पूछने पर कि वो आज आये साथियों तथा समाज को क्या संदेश देना चाहेंगे तो उन्होंने कहा कि समाजिक जागृती पैदा होने के बाद समाजिक संगठन बनना ज़रूरी है तथा उसकी मज़बूती के कारण समाजिक संघर्ष करना पड़ेगा तथा समाजिक क्रान्ति के बाद राजनीतिक क्रान्ति आ सकती है पर वो तब ही स्थिर रह सकती है जब समाजिक मज़बूती की तरफ बढ़ते समाजिक संघर्षों को पहल देंगे। इस उद्देश्य के लिए सच्चे, ईमानदार, समाज के साथ हित रखने वाले तथा खुद की तरक्की करने की बजाये समाज की तरक्की चाहने वाले हों तथा महात्मा गौतम के संदेश ’’बहुजन हिताये, बहुजन सुखाये’’ के सिद्धांत पर पहरा देने के योग्य हों। समाजिक संगठन मज़बूत न होने के कारण बहुजन समाज सता प्राप्ति के लिए मुश्किल महसूस कर रहा है। इस समय सागर की ओर से साथियों को कोल्ड ड्रिंक, मिठाई तथा चाय के साथ पुरी आओ भगत की तथा सागर साहिब की ओर से अनुवाद की पुस्तक भारत की पहली अध्यापिका सवित्री बाई फूले समाजिक क्रान्ति पुस्तक समाज सेवी साथियों को भेंट की गई।